JAATIVAAR JANAGANANA :- कई जातियां पिछड़ी वर्ग की सूची से हो सकती है बाहर |

 

कई जातियां पिछड़ी वर्ग की सूची से हो सकती है बाहर:-



आजादी के बाद जनगणना के साथ पहली बार होने वाली जातिवार गणना के आंकड़े आने के बाद कई जातियों को ओबीसी की सूची से बाहर होना पड़ सकता है। इसी तरह से आर्थिक, सामाजिक रूप से पिछड़ी कई जातियों को ओबीसी सूची में एंट्री भी मिल सकती है।

सरकार की कोशिश जातिवार जनगणना को आधार बनाकर ओबीसी के नाम पर हो रही जाति की राजनीति को पूरी तरह से ध्वस्त करने की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सर संघचालक मोहन भागवत के साथ चर्चा के बाद इसे हरी झंडी दे दी गई। उक्त बैठक में गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे।
 
लंबे समय से जातियों की गोलबंदी का हथियार बनी जातिवार गणना को हमेशा के लिए खत्म करने की खातिर पूरी तरह से सोच-विचार के बाद यह फैसला लिया गया। 

अब तक सिर्फ एक बार 1931 में हुई है जातिवार गणना:-

इस समय देश में सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ी जातियों का एकमात्र आंकड़ा 1931 की जनगणना का है और उसी के आधार पर देश में पिछड़ी जातियों की 52 प्रतिशत आबादी निर्धारित कर उनके लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रविधान किया गया। लेकिन अंग्रेजों ने 1941 में द्वितीय विश्व युद्ध के बीच खर्च का हवाला देकर 1941 में जातिवार गणना नहीं कराई और आजादी के बाद 1951 से विभिन्न सरकारों ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। 1931 के आंकड़ों पर 1991 में ओबीसी आरक्षण की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए गए, लेकिन अद्यतन आंकड़े जुटाने की कोशिश नहीं हुई। विभिन्न राज्यों में सर्वे के आधार पर समय-समय पर ओबीसी जातियां घोषित होती रहीं, लेकिन उन सर्वेक्षणों पर भी सवाल उठते रहे। 2011 में संप्रग सरकार ने सामाजिक आर्थिक जातीय जनगणना जरूर कराई, लेकिन इसे मूल जनगणना से बाहर रखकर सर्वेक्षण के रूप में किया गया। इनमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के कारण मनमोहन सिंह और नरेन्द्र मोदी दोनों सरकारों ने इसे जारी नहीं करने का फैसला किया।

कब शुरू हो सकती है ये प्रकिया?

कहां जा रहा है की जाति गणना की प्रक्रिया 2027 में ही शुरू हो पाएगी क्योंकि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में ही होने हैं। जनगणना में देरी का कारण कई तकनीकी दिक्कत को सुलझाना होगा। 2011 में हुई गणना में 40 लाख जातियां सामने आई थी जो 1931 की जाति गणना के दौरान चिन्हित 4147 जातियों से बहुत ज्यादा अधिक है। ऐसी ही समस्याओं को दूर करने के लिए बड़ी तैयारी करनी होगी।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ